IIT के लिए क्वालिफाई होने की एक नई तज़बीब | बेटे के हित में जारी!
एवरीडे लाइफ में कॉन्ट्रैक्ट्स आते हैं, कॉन्ट्रैक्ट्स जाते हैं। छोटे कॉन्ट्रैक्ट्स से लेकर, मोटे कॉन्ट्रैक्ट्स तक—मोस्टली ये कॉन्ट्रैक्ट्स या तो झगड़ा लगाते हैं, या झगड़े में घी डालते हैं। लेकिन, मार्केट में आया है एकदम नया, फ्रेश, तारो-ताज़ा कॉन्ट्रैक्ट जो एक बेटे ने बनाया अपने बाप के साथ!
एक स्केल से माप कर अंदाज़ा लगाए तो ये बोल सकते हैं कि इस कॉन्ट्रैक्ट ने काफ़ी मिक्स्ड रिएक्शन्स का पिटारा खोला है। इस सीन में जो बेटा है, उसका सोशल मीडिया पर यूज़रनेम है ‘Upset_Design_8656’। सबूत नहीं मिटने चाहिए, इसलिए इसने अपने सोशल मीडिया पर ये कॉन्ट्रैक्ट पोस्ट कर दिया और इसे बाइंडिंग बना दिया।
काफ़ी GenZ तरीक़ा है एक कॉन्ट्रैक्ट को ऑफ़िशियल करने का। कॉन्ट्रैक्ट को पढ़ने पर पता लगता है कि ये कोई मामूली बालिग़ उम्र की मस्ती नहीं है। मामला काफ़ी गंभीर है। शर्तें ही कुछ ऐसी लगी हैं।
पोस्ट करने का ढंग बिल्कुल भी “कैज़ुअल” नहीं है। बल्कि, पोस्ट का कैप्शन एकदम ड्रामैटिक है—तुम्हारी उस बेस्टि की तरह जो एक PJ पर भी 2 दिन तक हँसता रहता है। “My Father Made A Declaration”, ये है कैप्शन। कैप्शन पढ़कर ऐसा लगेगा कि पापा जी ने डोमेस्टिक हाउस रूल्स को रिवॉल्यूशनाइज़ कर दिया है।
कॉन्ट्रैक्ट कहता है कि अगर बेटे को B.Tech के बेस्ट इंस्टिट्यूट या बेस्ट यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिलेगा, तो पापा जी अपनी सैलरी का 40% उसे देंगे, वो भी हर महीने। हर महीने!! समझे? IITian बनने का सपना अब पर्सनल से भी ज़्यादा पर्सनल हो गया है।
पापड़ बेलकर, हँसकर, रोकर, आधा पागल होकर, जैसे-तैसे, बेटा ये कर पाया तो जस्ट इमैजिन—bro के लाइफ की डिक्शनरी से ‘broke’ हमेशा-हमेशा के लिए निकल जाएगा!
अच्छा क्लाइमैक्स है ना? ज़िंदगी रोज़ेस का बिस्तर नहीं है। ये क्लाइमैक्स नहीं, ये तो कहानी का हैप्पी स्टार्ट है।
कॉन्ट्रैक्ट में आगे लिखा है—अगर बेटा IITian नहीं बन पाया, तो पापा जी के रिटायरमेंट तक, वो हर महीने अपनी 100% सैलरी पापा जी को देगा। पापा जी pulled a good one, है ना?
बहुत ही कम शब्दों में, पापा जी ने बता दिया कि असली ‘बाप’ कौन है। अब ये इमैजिन करो—पापड़ बेलकर, हँसकर, रोकर, आधा पागल होकर, जैसे-तैसे सिलेबस ख़त्म किया, और फिर भी एडमिशन नहीं हुआ!
लाइफ की डिक्शनरी में ‘broke’ वर्ड का तो पता नहीं, लेकिन इतना ब्रोक ज़रूर हो जाएगा कि डिक्शनरी भी नहीं खरीद पाएगा। कोटा जाने वाले नन्हे-मुन्ने to-be IITians के लिए ये इंसिडेंट एक हॉरर फिल्म से कम नहीं होगा। बैंक अकाउंट मन ही मन कर्स करेगा और इज़्ज़त का फालूदा होगा, वो अलग।
लेकिन, मानना तो पड़ेगा। ऐसे कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करना और फिर अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके सबको चिल्ला-चिल्ला कर स्कीम बताना—ये एक स्टंट है जो हम किसी को एडवाइज़ नहीं करेंगे।
अब आगे क्या होगा?
क्या बेटे के नसीब में 40% ज़्यादा अय्याशी लिखी है?
या पापा जी रिटायरमेंट तक इतनी सेविंग्स कर लेंगे कि यूरोप ट्रिप करके आएंगे, वो भी दो बार?
ये तो ना तुम जानो, ना हम।
अपने IITian बेस्टीज़ के साथ ये ब्लॉग शेयर करो और उन्हें वार्न करो कि ऐसा कोई कॉन्ट्रैक्ट बनाने से पहले तुम्हें तो ना ही पूछें!
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